दरिया से फ़क़त इस लिए रिश्ता है हमारा
By wasim-nadirJanuary 5, 2024
दरिया से फ़क़त इस लिए रिश्ता है हमारा
इक शख़्स अभी नाव में बैठा है हमारा
दुनिया ने हमें अपनी तरफ़ खींच लिया है
ऐ 'इश्क़ तुझे आख़िरी सज्दा है हमारा
बैठे हैं बहुत लोग मगर किस को बताएँ
उस पेड़ से कुछ और ही रिश्ता है हमारा
तुम हम को जवाँ देख के हैरान हुई हो
पहचान तो लेतीं कि वो बेटा है हमारा
तुम जिस को घना पेड़ समझ बैठे हो 'नादिर'
कुछ ग़ौर तो कर लेते वो साया है हमारा
इक शख़्स अभी नाव में बैठा है हमारा
दुनिया ने हमें अपनी तरफ़ खींच लिया है
ऐ 'इश्क़ तुझे आख़िरी सज्दा है हमारा
बैठे हैं बहुत लोग मगर किस को बताएँ
उस पेड़ से कुछ और ही रिश्ता है हमारा
तुम हम को जवाँ देख के हैरान हुई हो
पहचान तो लेतीं कि वो बेटा है हमारा
तुम जिस को घना पेड़ समझ बैठे हो 'नादिर'
कुछ ग़ौर तो कर लेते वो साया है हमारा
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