देखे हैं जब से आब में हँसते हुए कँवल

By satyawan-satyaJanuary 5, 2024
देखे हैं जब से आब में हँसते हुए कँवल
आने लगे हैं ख़्वाब में हँसते हुए कँवल
ऐसे हैं सुर्ख़ होंठ गुलाबी से 'अक्स पर
रक्खे हैं ज्यूँ गुलाब में हँसते हुए कँवल


आँखें ख़ुमार से भरी साक़ी की देख कर
दिखने लगे शराब में हँसते हुए कँवल
जब से हुआ है 'इश्क़ हमें इक हसीन से
दिखते हैं हर शबाब में हँसते हुए कँवल


उस वक़्त इक ख़ुमार सा महफ़िल पे छा गया
जब आ गए नक़ाब में हँसते हुए कँवल
भेजे थे ख़त लबों से कभी उस ने चूम कर
वो मिल गए किताब में हँसते हुए कँवल


14990 viewsghazalHindi