देखो पुराने ख़्वाब नए ख़्वाब के लिए
By ahmar-nadeemFebruary 5, 2024
देखो पुराने ख़्वाब नए ख़्वाब के लिए
या'नी निज़ाम-ए-गुंबद-ओ-मेहराब के लिए
मिट्टी के इस बदन को ज़रूरत कफ़न की है
फ़ुर्सत नहीं है अतलस-ओ-कमख़्वाब के लिए
गुल तेरी मेहरबानी हो ख़ारों पे इस क़दर
अच्छा नहीं है बुलबुल-ए-बेताब के लिए
दश्त-ए-जुनूँ की राह में निकला था मैं मगर
वापस पलट के आ गया अहबाब के लिए
'अह्मर' कहाँ गए वो दिवाने कि रात-भर
दर-दर भटक रहे थे जो शब-ताब के लिए
या'नी निज़ाम-ए-गुंबद-ओ-मेहराब के लिए
मिट्टी के इस बदन को ज़रूरत कफ़न की है
फ़ुर्सत नहीं है अतलस-ओ-कमख़्वाब के लिए
गुल तेरी मेहरबानी हो ख़ारों पे इस क़दर
अच्छा नहीं है बुलबुल-ए-बेताब के लिए
दश्त-ए-जुनूँ की राह में निकला था मैं मगर
वापस पलट के आ गया अहबाब के लिए
'अह्मर' कहाँ गए वो दिवाने कि रात-भर
दर-दर भटक रहे थे जो शब-ताब के लिए
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