देर से अपने अपने घेरे में
By fahmi-badayuniFebruary 5, 2024
देर से अपने अपने घेरे में
लोग बैठे हुए हैं रस्ते में
एक गाहक था वो भी छोड़ गया
अब रखेंगे दुकान अकेले में
मैं ने पिंजरा तो तोड़ डाला मगर
फ़ाख़्ता आ गई लपेटे में
बीन बजते ही एक और नागिन
नाचने लगती है सपेरे में
उस के क़दमों में डाल पहला फूल
जिस ने मिट्टी भरी थी गमले में
घर में इक आइना भी होता था
बस वही ढूँडता हूँ मलबे में
बच्चे-बच्चे को कर रहा हूँ सलाम
उस के कूचे के पहले फेरे में
एक मछली जो रेत पर तड़पी
जान सी पड़ गई मछेरे में
लोग बैठे हुए हैं रस्ते में
एक गाहक था वो भी छोड़ गया
अब रखेंगे दुकान अकेले में
मैं ने पिंजरा तो तोड़ डाला मगर
फ़ाख़्ता आ गई लपेटे में
बीन बजते ही एक और नागिन
नाचने लगती है सपेरे में
उस के क़दमों में डाल पहला फूल
जिस ने मिट्टी भरी थी गमले में
घर में इक आइना भी होता था
बस वही ढूँडता हूँ मलबे में
बच्चे-बच्चे को कर रहा हूँ सलाम
उस के कूचे के पहले फेरे में
एक मछली जो रेत पर तड़पी
जान सी पड़ गई मछेरे में
17339 viewsghazal • Hindi