दिल के अरमाँ निकाल बैठे थे
By surender-sagarJanuary 5, 2024
दिल के अरमाँ निकाल बैठे थे
जीना कर के मुहाल बैठे थे
ये तो अच्छा हुआ तू छोड़ गया
हम तिरा वहम पाल बैठे थे
ख़्वाब बिखरे पड़े थे आँगन में
चाँद तारे निढाल बैठे थे
तुम पे दिल आना था वगरना तो
जाने कितने जमाल बैठे थे
सारी उम्मीद छोड़ दी 'सागर'
सारे शिकवा भी टाल बैठे थे
जीना कर के मुहाल बैठे थे
ये तो अच्छा हुआ तू छोड़ गया
हम तिरा वहम पाल बैठे थे
ख़्वाब बिखरे पड़े थे आँगन में
चाँद तारे निढाल बैठे थे
तुम पे दिल आना था वगरना तो
जाने कितने जमाल बैठे थे
सारी उम्मीद छोड़ दी 'सागर'
सारे शिकवा भी टाल बैठे थे
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