दिल के अरमाँ निकाल बैठे थे

By surender-sagarJanuary 5, 2024
दिल के अरमाँ निकाल बैठे थे
जीना कर के मुहाल बैठे थे
ये तो अच्छा हुआ तू छोड़ गया
हम तिरा वहम पाल बैठे थे


ख़्वाब बिखरे पड़े थे आँगन में
चाँद तारे निढाल बैठे थे
तुम पे दिल आना था वगरना तो
जाने कितने जमाल बैठे थे


सारी उम्मीद छोड़ दी 'सागर'
सारे शिकवा भी टाल बैठे थे
83101 viewsghazalHindi