दिल में दम-भर के लिए नावक-ए-जानाँ न रहा

By raft-bahraichiJanuary 4, 2024
दिल में दम-भर के लिए नावक-ए-जानाँ न रहा
मेज़बाँ से कभी ख़ुश हो के ये मेहमाँ न रहा
अश्क सब ख़ुश्क हुए आँखों में सोज़-ए-ग़म से
चलो अच्छा हुआ रुस्वाई का सामाँ न रहा


इस क़दर कर दिया सैराब मिरे छालों ने
एक भी तिश्ना-दहन ख़ार-ए-बयाबाँ न रहा
पहले अरमाँ था तिरे मिलने का तुझ से मिल कर
अब ये अरमाँ है कि दिल में कोई अरमाँ न रहा


क्या बुरी चीज़ मोहब्बत है ख़ुदा रहम करे
यही सुनते हैं कि 'राफ़त' भी मुसलमाँ न रहा
75997 viewsghazalHindi