दिल में है पर ज़ीस्त में शामिल नहीं है

By surender-sagarJanuary 5, 2024
दिल में है पर ज़ीस्त में शामिल नहीं है
ख़ूबसूरत है मगर हासिल नहीं है
जाँ निकल जाती है गर वो मुस्कुरा दे
कौन कहता है कि वो क़ातिल नहीं है


ये शिकायत है मिरी अपने ख़ुदा से
गाल पर उस के कोई भी तिल नहीं है
गर हक़ीक़त में नहीं हम पा सके तो
ख़्वाब में पा लेना तो मुश्किल नहीं है


चाँद है तारे हैं सन्नाटा है हम हैं
और तुम कहते हो कि महफ़िल नहीं है
डूब जाऊँ प्यार में 'सागर' तुम्हारे
अब सिवा तेरे मिरी मंज़िल नहीं है


16952 viewsghazalHindi