दिल में जलते हैं हसरतों के अलाव
By shameem-shama-sidiqiJanuary 5, 2024
दिल में जलते हैं हसरतों के अलाव
मेरी आँखों की रौशनी पे न जाओ
इक सियह रात है हमारा वजूद
देखना है तो दिल की शम' जलाओ
वो अलग जिन का ज़ाहिर-ओ-बातिन
कह रहे हैं हमें नक़ाब उठाओ
मोम हो कर पिघल गए पत्थर
आज की शब जले कुछ ऐसे अलाव
हम तो अपनी सी कर के हार गए
तुम ही कुछ बात बन सके तो बनाओ
शम'एँ आतिश-बयान होती हैं
मेरे अश'आर सुन के जी न जलाओ
दौर है 'शम'' साफ़-गोई का
अब हक़ीक़त को शा'इरी न बनाओ
मेरी आँखों की रौशनी पे न जाओ
इक सियह रात है हमारा वजूद
देखना है तो दिल की शम' जलाओ
वो अलग जिन का ज़ाहिर-ओ-बातिन
कह रहे हैं हमें नक़ाब उठाओ
मोम हो कर पिघल गए पत्थर
आज की शब जले कुछ ऐसे अलाव
हम तो अपनी सी कर के हार गए
तुम ही कुछ बात बन सके तो बनाओ
शम'एँ आतिश-बयान होती हैं
मेरे अश'आर सुन के जी न जलाओ
दौर है 'शम'' साफ़-गोई का
अब हक़ीक़त को शा'इरी न बनाओ
98336 viewsghazal • Hindi