दिल मिरा उस शख़्स की जागीर है
By syed-masood-naqviJanuary 5, 2024
दिल मिरा उस शख़्स की जागीर है
जिस के आने में अभी ताख़ीर है
शान से जीता हूँ जो मैं ज़िंदगी
ये मिरे अज्दाद की तासीर है
अस्ल में देखा गया तो ज़िंदगी
बस हमारी मौत की तहरीर है
दिल मिरा यूँ ही नहीं घायल हुआ
कुछ तुम्हारी भी नज़र में तीर है
आदमी ये काम का है सोचना
ये भी तो इक सोच की ता'मीर है
मैं जिसे समझा था अपना हम-सफ़र
देर से बोला कि बस रहगीर है
आज के इंसान को देखो ज़रा
हर किसी के पैर में ज़ंजीर है
ये ज़माना किस तरफ़ बढ़ने लगा
उस तरफ़ ता'ज़ीर ही ता'ज़ीर है
मैं हथेली पर लिए इक ख़्वाब को
जा रहा हूँ जिस तरफ़ ता'बीर है
जिस के आने में अभी ताख़ीर है
शान से जीता हूँ जो मैं ज़िंदगी
ये मिरे अज्दाद की तासीर है
अस्ल में देखा गया तो ज़िंदगी
बस हमारी मौत की तहरीर है
दिल मिरा यूँ ही नहीं घायल हुआ
कुछ तुम्हारी भी नज़र में तीर है
आदमी ये काम का है सोचना
ये भी तो इक सोच की ता'मीर है
मैं जिसे समझा था अपना हम-सफ़र
देर से बोला कि बस रहगीर है
आज के इंसान को देखो ज़रा
हर किसी के पैर में ज़ंजीर है
ये ज़माना किस तरफ़ बढ़ने लगा
उस तरफ़ ता'ज़ीर ही ता'ज़ीर है
मैं हथेली पर लिए इक ख़्वाब को
जा रहा हूँ जिस तरफ़ ता'बीर है
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