दिल-ओ-दिमाग़ पे अब के घुटन बला की है
By wasim-nadirJanuary 5, 2024
दिल-ओ-दिमाग़ पे अब के घुटन बला की है
हवा के साथ ज़रूरत मुझे दु'आ की है
बिछड़ रहे हैं मोहब्बत में बद-गुमाँ हो कर
यहाँ से उस ने फ़साने की इब्तिदा की है
सब अपने नाम की तख़्ती लगाए बैठे हैं
पता सभी को है ये सल्तनत ख़ुदा की है
हर एक धुन पे थिरकना हमारे बस का नहीं
हमारे जिस्म को 'आदत उसी सदा की है
ये साफ़ साफ़ 'इबारत ये पुर-सुकूँ मंज़र
तुम्हारी आँखों में तस्वीर किस जगह की है
हवा के साथ ज़रूरत मुझे दु'आ की है
बिछड़ रहे हैं मोहब्बत में बद-गुमाँ हो कर
यहाँ से उस ने फ़साने की इब्तिदा की है
सब अपने नाम की तख़्ती लगाए बैठे हैं
पता सभी को है ये सल्तनत ख़ुदा की है
हर एक धुन पे थिरकना हमारे बस का नहीं
हमारे जिस्म को 'आदत उसी सदा की है
ये साफ़ साफ़ 'इबारत ये पुर-सुकूँ मंज़र
तुम्हारी आँखों में तस्वीर किस जगह की है
59937 viewsghazal • Hindi