दिल परेशान मिरा गर्दिश-ए-हालात से है

By afsar-deccaniJanuary 1, 2024
दिल परेशान मिरा गर्दिश-ए-हालात से है
एक उम्मीद बहर-हाल तिरी ज़ात से है
कब ज़माने से भला दाद तलब की मैं ने
कम से कम तुम को सुकूँ तो मिरे नग़्मात से है


मुझ को दुनिया की तवज्जोह की ज़रूरत क्या है
तू तो आगाह इलाही मिरे हालात से है
अब मुझे तेरी जुदाई का कोई रंज नहीं
हाँ मगर थोड़ा गिला अपने ही हालात से है


क्या करूँ तुझ से बिछड़ कर मैं कहाँ जाऊँगा
मेरी साँसों में रमक़ तेरे जवाबात से है
अपने दुश्मन को भी दुश्मन नहीं समझा मैं ने
ज़िंदगी तू भी तो वाक़िफ़ मिरे हालात से है


कौन हूँ क्या हूँ हक़ीक़त मिरी क्या है 'अफ़सर'
वास्ता आप को भी ऐसे सवालात से है
26769 viewsghazalHindi