दिल से अफ़रंग हो गया हूँ मैं

By ahmad-ayazFebruary 24, 2025
दिल से अफ़रंग हो गया हूँ मैं
हाँ मगर तंग हो गया हूँ मैं
रंग कोई भी अब नहीं चढ़ता
जब से बे-रंग हो गया हूँ मैं


फ़ासले हैं मिरी जबीं पे नक़्श
मील का संग हो गया हूँ मैं
मेरी आँखों में सब म'आनी देख
मिस्ल-ए-फ़रहंग हो गया हूँ मैं


उस के साए में जज़्ब रंगों को
देख कर दंग हो गया हूँ मैं
ग़ौर से देखते हो क्या ऐ दोस्त
इतना बे-ढंग हो गया हूँ मैं


ख़ुद को पाने की जुस्तुजू में 'अयाज़'
भीड़ का अंग हो गया हूँ मैं
64251 viewsghazalHindi