दिन रात की आफ़त के सिवा कुछ नहीं आता

By shyam-vashishtha-shahidJanuary 5, 2024
दिन रात की आफ़त के सिवा कुछ नहीं आता
चाहत में मुसीबत के सिवा कुछ नहीं आता
लो चाय में भी चाय की पत्ती नहीं डाली
तुम को तो मोहब्बत के सिवा कुछ नहीं आता


दुनिया की हर इक माँ में कमी ये है कि उस को
बच्चों की हिफ़ाज़त के सिवा कुछ नहीं आता
सपनों में भी सपनों का जहाँ ढूँढने वालो
सपनों में हक़ीक़त के सिवा कुछ नहीं आता


दुश्मन मिरे यारों से सबक़ सीख रहे हैं
यारों को 'अदावत के सिवा कुछ नहीं आता
नेकी भी कमाई है भलाई भी मिली है
पर काम तो दौलत के सिवा कुछ नहीं आता


इस दौर में अपना या पराया नहीं कोई
अब याद ज़रूरत के सिवा कुछ नहीं आता
ख़ुद अपने कहे पर वो 'अमल क्यों नहीं करते
क्या उन को नसीहत के सिवा कुछ नहीं आता


30147 viewsghazalHindi