दीवार-ओ-दर के साथ कोई इंतिज़ाम है

By vipul-kumarJanuary 5, 2024
दीवार-ओ-दर के साथ कोई इंतिज़ाम है
रुकता मगर चलूँ कि मिरे घर पे शाम है
ये आँख ख़्वाब-ख़्वाब थी ये फूल रंग-रंग
ये हुस्न रम्ज़ रम्ज़ था जो बाम बाम है


काई जमी हुई है समुंदर के आस-पास
सब्ज़े का इक पयाम है और मेरे नाम है
पहचानता हूँ अपनी उदासी के रंग से
पानी पे तैरती हुई शब है कि शाम है


58720 viewsghazalHindi