दोनों जहाँ में मुझ को झुकाया नहीं गया

By syed-masood-naqviJanuary 5, 2024
दोनों जहाँ में मुझ को झुकाया नहीं गया
सर से मिरे बुज़ुर्गों का साया नहीं गया
सीने में मेरे कैसी तजल्ली ये दफ़्न है
जो आग से भी मुझ को जलाया नहीं गया


देखा जो मैं ने सच को ज़ियादा क़रीब से
फिर चेहरा उस का मुझ से बनाया नहीं गया
हैरत में पड़ गई है ये बीनाई देख कर
मंज़र जो इस जहाँ को दिखाया नहीं गया


मेरे ख़िलाफ़ जाओ तो पहले ये सोचना
बिन पानी मछलियों को जिलाया नहीं गया
ये दुश्मनी तो यार किसी काम की नहीं
इक यार तक ठिकाने लगाया नहीं गया


ख़ून-ए-हुसैन आज भी है मेरी आँख में
ख़ून-ए-हुसैन मुझ से भुलाया नहीं गया
दुनिया से खेलना तो बस इक शौक़ है मिरा
इस शौक़ में किसी को हराया नहीं गया


हैरान हूँ मैं यार कि वो सब के साथ है
जिस से किसी का साथ निभाया नहीं गया
तुम तो बता रहे थे हमें अपने मन की बात
हम से तो अपना हाल बताया नहीं गया


मैं बेवफ़ा नहीं हूँ मगर थोड़ा सख़्त हूँ
लेकिन तिरी समझ में जो आया नहीं गया
हम हिजरतों के मारे हुए ख़ुश-नसीब लोग
हम से कोई भी रिश्ता निभाया नहीं गया


परवरदिगार तू ने ये कैसे बना दिया
पानी में हम से रस्ता बनाया नहीं गया
क्या मौत की बिसात है जो सामना करे
'मस'ऊद' को किसी से हिलाया नहीं गया


98214 viewsghazalHindi