दोनों तरफ़ से रब्त के पहलू निकाल कर
By ankit-mauryaFebruary 5, 2024
दोनों तरफ़ से रब्त के पहलू निकाल कर
वो ले गया है आँख से आँसू निकाल कर
इन के सहारे कुछ नई सी धुन बनाऊँगा
लाया हूँ उस के पाँव से घुंघरू निकाल कर
वो हुस्न भी लगे है मुझे तब से 'आम सा
जब से गया वो 'इश्क़ का जादू निकाल कर
झपकी थी मैं ने आँख भी जिस के यक़ीन पर
वो जा चुका है नींद में बाज़ू निकाल कर
मुझ को बदन नसीब था पर रूह के बग़ैर
उस ने दिया भी फूल तो ख़ुशबू निकाल कर
वो ले गया है आँख से आँसू निकाल कर
इन के सहारे कुछ नई सी धुन बनाऊँगा
लाया हूँ उस के पाँव से घुंघरू निकाल कर
वो हुस्न भी लगे है मुझे तब से 'आम सा
जब से गया वो 'इश्क़ का जादू निकाल कर
झपकी थी मैं ने आँख भी जिस के यक़ीन पर
वो जा चुका है नींद में बाज़ू निकाल कर
मुझ को बदन नसीब था पर रूह के बग़ैर
उस ने दिया भी फूल तो ख़ुशबू निकाल कर
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