दुनिया से जिसे कोई सरोकार नहीं है
By hiralal-yadav-hiraJanuary 3, 2024
दुनिया से जिसे कोई सरोकार नहीं है
दुनिया में वो रहने का भी हक़दार नहीं है
फूलों की तमन्ना है ज़माने में सभी को
काँटों का यहाँ कोई तलबगार नहीं है
छोड़ो भी न अब ख़्वाब मोहब्बत के दिखाओ
दुख और जिगर सहने को तैयार नहीं है
औलाद की अर्थी कोई कंधों पे उठाए
क़िस्मत की कोई इस से बड़ी मार नहीं है
मायूस न 'हीरा' हो जो तन्हा है जहाँ में
तक़दीर में सब के तो लिखा प्यार नहीं है
दुनिया में वो रहने का भी हक़दार नहीं है
फूलों की तमन्ना है ज़माने में सभी को
काँटों का यहाँ कोई तलबगार नहीं है
छोड़ो भी न अब ख़्वाब मोहब्बत के दिखाओ
दुख और जिगर सहने को तैयार नहीं है
औलाद की अर्थी कोई कंधों पे उठाए
क़िस्मत की कोई इस से बड़ी मार नहीं है
मायूस न 'हीरा' हो जो तन्हा है जहाँ में
तक़दीर में सब के तो लिखा प्यार नहीं है
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