दूर कोई हो यही हाल हमेशा देखा
By hiralal-yadav-hiraJanuary 3, 2024
दूर कोई हो यही हाल हमेशा देखा
टूटता रोज़ ग़रीबों का भरोसा देखा
और कुछ भी नहीं भाता है उन्हें दुनिया में
जब से आँखों ने सनम आप का चेहरा देखा
ज़िंदगी-भर की तड़प दर्द-भरी तन्हाई
'इश्क़-बाज़ी का यही जग में नतीजा देखा
दिल में इक टीस उठी आँखों में आँसू आए
जब भी 'आशिक़ का किसी जग में जनाज़ा देखा
मेरी मय्यत पे वो आए तो ये कहना उस से
तेरे 'आशिक़ ने तिरा आज भी रस्ता देखा
वो हो ज़रदार कोई या हो वो मुफ़्लिस 'हीरा'
ग़म के दरिया में हर इक शख़्स को डूबा देखा
टूटता रोज़ ग़रीबों का भरोसा देखा
और कुछ भी नहीं भाता है उन्हें दुनिया में
जब से आँखों ने सनम आप का चेहरा देखा
ज़िंदगी-भर की तड़प दर्द-भरी तन्हाई
'इश्क़-बाज़ी का यही जग में नतीजा देखा
दिल में इक टीस उठी आँखों में आँसू आए
जब भी 'आशिक़ का किसी जग में जनाज़ा देखा
मेरी मय्यत पे वो आए तो ये कहना उस से
तेरे 'आशिक़ ने तिरा आज भी रस्ता देखा
वो हो ज़रदार कोई या हो वो मुफ़्लिस 'हीरा'
ग़म के दरिया में हर इक शख़्स को डूबा देखा
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