एक दम दिल में उतर जाए जो ख़ंजर आप का
By farhat-ehsasFebruary 6, 2024
एक दम दिल में उतर जाए जो ख़ंजर आप का
'फ़रहत-एहसास' अपना बन जाए क़लंदर आप का
हो के चकना-चूर फिर पुर-नूर होना है मुझे
कब मिरे शीशे से टकराएगा पत्थर आप का
रक़्स मेरा जिस्म चाहे जिस तसव्वुर में करे
रक़्स के पेश-ए-नज़र रहता है महवर आप का
सख़्त हैरत में पड़े हैं शह्र भर के अहल-ए-वस्ल
रात भर ख़ाली पड़ा रहता है बिस्तर आप का
भीड़ में से सर उठा कर इस क़दर मत देखिए
भीड़ वर्ना काट कर ले जाएगी सर आप का
आप तो बस एक शब आग़ोश में आ जाइए
सुब्ह होने तक निकल जाएगा सब डर आप का
मुझ को अपनी एक क़तरा हुक्मरानी चाहिए
और इस के बा'द फिर सारा समुंदर आप का
बेचता है थोक में तन्क़ीद का बाज़ार उसे
'फ़रहत-एहसास' अपने शे'रों में है फुटकर आप का
'फ़रहत-एहसास' अपना बन जाए क़लंदर आप का
हो के चकना-चूर फिर पुर-नूर होना है मुझे
कब मिरे शीशे से टकराएगा पत्थर आप का
रक़्स मेरा जिस्म चाहे जिस तसव्वुर में करे
रक़्स के पेश-ए-नज़र रहता है महवर आप का
सख़्त हैरत में पड़े हैं शह्र भर के अहल-ए-वस्ल
रात भर ख़ाली पड़ा रहता है बिस्तर आप का
भीड़ में से सर उठा कर इस क़दर मत देखिए
भीड़ वर्ना काट कर ले जाएगी सर आप का
आप तो बस एक शब आग़ोश में आ जाइए
सुब्ह होने तक निकल जाएगा सब डर आप का
मुझ को अपनी एक क़तरा हुक्मरानी चाहिए
और इस के बा'द फिर सारा समुंदर आप का
बेचता है थोक में तन्क़ीद का बाज़ार उसे
'फ़रहत-एहसास' अपने शे'रों में है फुटकर आप का
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