इक झलक में ले गई सब लूट कर अच्छा लगा

By shariq-ali-shariqJanuary 5, 2024
इक झलक में ले गई सब लूट कर अच्छा लगा
उस ने नज़रों से मिलाई जब नज़र अच्छा लगा
वो अचानक मुझ से मिलने आए घर अच्छा लगा
मेरे ग़म की कर गए पल में सहर अच्छा लगा


देख कर चेहरे को उन के देखता ही रह गया
हो गया मुझ पर न जाने कब असर अच्छा लगा
दिल के काग़ज़ पर ग़ज़ल बन कर उतर आई है वो
सोचता था जिस को मैं पहरों-पहर अच्छा लगा


हुस्न वालों से मोहब्बत का सिला ये पा लिया
चोट खाई दिल पे है घायल जिगर अच्छा लगा
चैन से वो भी कहाँ है छोड़ कर 'शारिक़' मुझे
जागती रहती है वो भी रात-भर अच्छा लगा


83404 viewsghazalHindi