फ़ुरात-ए-'इश्क़ पर पहरा लगा है
By mohsin-changeziJanuary 4, 2024
फ़ुरात-ए-'इश्क़ पर पहरा लगा है
मिरा एहसास प्यासा रह गया है
न जाने किस घड़ी वो मुझ को छोड़े
ये दुख इक बोझ बनता जा रहा है
वो इक लम्हा जिसे कहते हैं क़ुर्बत
उसी लम्हे का हम में फ़ासला है
तिरी आँखें दुहाई दे रही हैं
तिरे अंदर कोई ख़ेमा जला है
मैं अपनी सोच से महव-ए-तकल्लुम
वो मेरे पास तन्हा रह गया है
मिरा एहसास प्यासा रह गया है
न जाने किस घड़ी वो मुझ को छोड़े
ये दुख इक बोझ बनता जा रहा है
वो इक लम्हा जिसे कहते हैं क़ुर्बत
उसी लम्हे का हम में फ़ासला है
तिरी आँखें दुहाई दे रही हैं
तिरे अंदर कोई ख़ेमा जला है
मैं अपनी सोच से महव-ए-तकल्लुम
वो मेरे पास तन्हा रह गया है
81392 viewsghazal • Hindi