गर न होता है तेरी अना के लिए

By sarahat-ahmad-sarahatJanuary 4, 2024
गर न होता है तेरी अना के लिए
तो निभाता न पास-ए-वफ़ा के लिए
तुम मिरे ज़ब्त पर रो पड़ोगे कहीं
आज़माओ न मुझ को ख़ुदा के लिए


शम' तूफ़ाँ की आग़ोश में सो गई
बुझ गई शब तड़प कर ज़िया के लिए
रुख़ ज़रा मोड़ ले इस क़फ़स की तरफ़
ऐ नसीम-ए-सहर अब ख़ुदा के लिए


45016 viewsghazalHindi