गरचे औलाद बन के बैठे हैं

By faisal-qadri-gunnauriJanuary 2, 2024
गरचे औलाद बन के बैठे हैं
फ़ख़्र-ए-अज्दाद बन के बैठे हैं
तुम भी बन जाओ 'इश्क़ में शीरीं
हम तो फ़रहाद बन के बैठे हैं


बन के बैठे हैं वो सरापा ग़ज़ल
और हम दाद बन के बैठे हैं
तू अगरचे हमें भुला बैठा
हम तिरी याद बन के बैठे हैं


पुर-फ़ितन दौर है बचे रहना
लोग जल्लाद बन के बैठे हैं
कैसे माइल न हो कोई 'फ़ैसल'
वो परी-ज़ाद बन के बैठे हैं


88708 viewsghazalHindi