ग़ैर-मुमकिन है कि वो मुझ से ख़फ़ा हो जाएगा
By aalam-nizamiJanuary 18, 2024
ग़ैर-मुमकिन है कि वो मुझ से ख़फ़ा हो जाएगा
और अगर ऐसा हुआ तो मो'जिज़ा हो जाएगा
उस की यादों की मुसलसल छेड़ से कुछ हो न हो
दिल के ज़ख़्मों का मगर मौसम हरा हो जाएगा
तू मिरी ठोकर में है या मैं तिरी ठोकर में हूँ
गर्दिश-ए-दौराँ किसी दिन फ़ैसला हो जाएगा
कर रहा है जो मिरा नुक़्सान अपनी ज़ात से
है उसे ये ज़ो'म वो मेरा ख़ुदा हो जाएगा
है मिसाल-ए-क़तरा-ए-शबनम अंधेरे का ग़ुरूर
इक ज़रा सी रौशनी से ये फ़ना हो जाएगा
आओ मिल कर एकता की मश'अलें रौशन करें
दो ही दिन में नफ़रतों का ख़ात्मा हो जाएगा
ख़्वाब आज़ादी के देखे थे सुकूँ के वास्ते
क्या ख़बर थी मुल्क मेरा कर्बला हो जाएगा
और अगर ऐसा हुआ तो मो'जिज़ा हो जाएगा
उस की यादों की मुसलसल छेड़ से कुछ हो न हो
दिल के ज़ख़्मों का मगर मौसम हरा हो जाएगा
तू मिरी ठोकर में है या मैं तिरी ठोकर में हूँ
गर्दिश-ए-दौराँ किसी दिन फ़ैसला हो जाएगा
कर रहा है जो मिरा नुक़्सान अपनी ज़ात से
है उसे ये ज़ो'म वो मेरा ख़ुदा हो जाएगा
है मिसाल-ए-क़तरा-ए-शबनम अंधेरे का ग़ुरूर
इक ज़रा सी रौशनी से ये फ़ना हो जाएगा
आओ मिल कर एकता की मश'अलें रौशन करें
दो ही दिन में नफ़रतों का ख़ात्मा हो जाएगा
ख़्वाब आज़ादी के देखे थे सुकूँ के वास्ते
क्या ख़बर थी मुल्क मेरा कर्बला हो जाएगा
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