घर में रौज़न नहीं रहा कोई
By fahmi-badayuniFebruary 5, 2024
घर में रौज़न नहीं रहा कोई
अब नहीं आएगी सदा कोई
पूछ कर देखते पता अपना
काश हम को भी जानता कोई
मैं ने मस्जिद में जाना छोड़ दिया
रोज़ मिल जाता था ख़ुदा कोई
सारे वीराने हो गए नाकाम
मुझ को तन्हा न कर सका कोई
ज़िंदा रहने के मशवरे के साथ
यार तरकीब भी बता कोई
आरज़ू थी कि एक बार मुझे
मेरी आँखों से देखता कोई
चीख़ने वाले हो गए ख़ामोश
फिर दरीचा नहीं खुला कोई
ज़ह्र इतने पिलाए लोगों ने
मुझ में ज़िंदा नहीं बचा कोई
अब नहीं आएगी सदा कोई
पूछ कर देखते पता अपना
काश हम को भी जानता कोई
मैं ने मस्जिद में जाना छोड़ दिया
रोज़ मिल जाता था ख़ुदा कोई
सारे वीराने हो गए नाकाम
मुझ को तन्हा न कर सका कोई
ज़िंदा रहने के मशवरे के साथ
यार तरकीब भी बता कोई
आरज़ू थी कि एक बार मुझे
मेरी आँखों से देखता कोई
चीख़ने वाले हो गए ख़ामोश
फिर दरीचा नहीं खुला कोई
ज़ह्र इतने पिलाए लोगों ने
मुझ में ज़िंदा नहीं बचा कोई
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