ग़ज़ल आसमानी नहीं हो रही है

By fahmi-badayuniFebruary 5, 2024
ग़ज़ल आसमानी नहीं हो रही है
कि क़ाबू से बाहर ज़मीं हो रही है
चलो खेलते हैं मोहब्बत मोहब्बत
मगर बोलने की नहीं हो रही है


मियाँ क़ैस मस्जिद के अन्दर पड़े हैं
कहीं की 'इबादत कहीं हो रही है
ठिकाना नहीं बदला बारिश ने अब तक
जहाँ हो चुकी थी वहीं हो रही है


39095 viewsghazalHindi