ग़ज़ल छेड़ी है 'नासिर' क्या हुआ है

By nasir-misbahiJanuary 4, 2024
ग़ज़ल छेड़ी है 'नासिर' क्या हुआ है
पुराना ज़ख़्म फिर ताज़ा हुआ है
तुम्हें भी दिल-लगी महँगी पड़ी है
मुझे भी प्यार में घाटा हुआ है


ज़रा ज़ुल्फ़ों को बल दे दे सितमगर
तिरी ज़ुल्फ़ों में दिल उलझा हुआ है
तिरी क़िस्मत में मैं हूँ या नहीं हूँ
मिरी कुंडली में तू बैठा हुआ है


गुल-ओ-बुलबुल के सस्ते चोचलों में
हमेशा बाग़बाँ रुस्वा हुआ है
मिरा रहबर न बन उँगली पकड़ ले
तू मेरे सामने पैदा हुआ है


मिरा दिल ख़ुद मिरा अपना नहीं है
मुझे तो प्यार भी झूटा हुआ है
मुझे सब देखने क्यों आ रहे हैं
ज़रा मैं भी तो देखूँ क्या हुआ है


तुम्हारा दिल हमारे पास अच्छा
उठा लो मेज़ पर रक्खा हुआ है
कहीं मिल जाए 'नासिर' तो बताना
उसे देखे हुए 'अर्सा हुआ है


40868 viewsghazalHindi