गुलशन सूरज चाँद सितारे
By fahmi-badayuniFebruary 5, 2024
गुलशन सूरज चाँद सितारे
पढ़ता हूँ अख़बार तुम्हारे
ऐसे किए कुछ उस ने इशारे
ज़ेहन के हो गए वारे न्यारे
भारी हैं संदूक़ हमारे
कौन हमें उस पार उतारे
मर न सके चौखट पर उस की
फिरते रहो अब मारे-मारे
जीत गई हैं उस की परियाँ
हार गए जिन्नात हमारे
जूझ रहा हूँ मैं लहरों से
नाव बंधी है नदी किनारे
गुल ही नहीं उस की बगिया के
काँटे भी लगते हैं प्यारे
पढ़ता हूँ अख़बार तुम्हारे
ऐसे किए कुछ उस ने इशारे
ज़ेहन के हो गए वारे न्यारे
भारी हैं संदूक़ हमारे
कौन हमें उस पार उतारे
मर न सके चौखट पर उस की
फिरते रहो अब मारे-मारे
जीत गई हैं उस की परियाँ
हार गए जिन्नात हमारे
जूझ रहा हूँ मैं लहरों से
नाव बंधी है नदी किनारे
गुल ही नहीं उस की बगिया के
काँटे भी लगते हैं प्यारे
11317 viewsghazal • Hindi