है क़ैद-ओ-बंद सी हालत मिरी रिहाई में

By shehzad-anjum-burhaniJanuary 5, 2024
है क़ैद-ओ-बंद सी हालत मिरी रिहाई में
तो सोचता हूँ ख़लल डाल दूँ ख़ुदाई में
ज़माना जिन की क़यादत में गामज़न था वो लोग
भटक गए तिरी आँखों की रहनुमाई में


गुज़िश्ता शब का कोई ऐश खुल नहीं पाता
बड़े मज़े हैं यहाँ दिन की पारसाई में
कहाँ हूँ मैं कि जो हैरत-ज़दा ज़माना है
कहाँ हो तुम कि जो शामिल थे जग-हँसाई में


कुछ और देर न सूरज उगे कि रौशन हैं
मिरे चराग़ हवाओं की रहनुमाई में
96852 viewsghazalHindi