है वस्ल अगर इस में तो फ़ुर्क़त भी बहुत है

By anaam-damohiFebruary 5, 2024
है वस्ल अगर इस में तो फ़ुर्क़त भी बहुत है
ये 'इश्क़ है और इस में अज़िय्यत भी बहुत है
आसान नहीं राह मोहब्बत की दिवाने
ग़म भी है बहुत इस में मसर्रत भी बहुत है


आहिस्ता से कर देता है वो चाक गरेबाँ
उस माह-जबीं रुख़ की करामात भी बहुत है
वैसे तो नहीं दिल में कोई उस के 'अलावा
ऐसे तो बहुत भीड़ है वुस'अत भी बहुत है


आ आ के मिरे कान में लेतीं हैं तिरा नाम
सरगोश हवाओं में शरारत भी बहुत है
इक वक़्त था महरूम था हर चीज़ से 'इन'आम'
अब नाम है रुत्बा भी है शोहरत भी बहुत है


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