हम-नफ़स क्या कहूँ क्या क्या शब-ए-हिज्राँ देखा
By raft-bahraichiJanuary 4, 2024
हम-नफ़स क्या कहूँ क्या क्या शब-ए-हिज्राँ देखा
मौत तो देखी नहीं मौत का सामाँ देखा
दिल के हर दाग़-ए-मोहब्बत को फ़रोज़ाँ देखा
हम ने घर बैठे हुए लुत्फ़-ए-चराग़ाँ देखा
का'बा-ओ-दैर गए ढूँडने ना-फ़हमी थी
उन को देखा भी तो नज़दीक-ए-रग-ए-जाँ देखा
नाले बेज़ार असर से हैं असर नाले से
दोस्त को दोस्त का दुश्मन शब-ए-हिज्राँ देखा
वो दिल-ए-ज़ार हो मेरा कि हो शम’-ए-सोज़ाँ
जिस को देखा तिरी महफ़िल में परेशाँ देखा
फिर बहार आई ख़िज़ाँ-दीदा चमन में सद-शुक्र
आज फिर 'राफ़त'-ए-महज़ूँ को ग़ज़ल-ख़्वाँ देखा
मौत तो देखी नहीं मौत का सामाँ देखा
दिल के हर दाग़-ए-मोहब्बत को फ़रोज़ाँ देखा
हम ने घर बैठे हुए लुत्फ़-ए-चराग़ाँ देखा
का'बा-ओ-दैर गए ढूँडने ना-फ़हमी थी
उन को देखा भी तो नज़दीक-ए-रग-ए-जाँ देखा
नाले बेज़ार असर से हैं असर नाले से
दोस्त को दोस्त का दुश्मन शब-ए-हिज्राँ देखा
वो दिल-ए-ज़ार हो मेरा कि हो शम’-ए-सोज़ाँ
जिस को देखा तिरी महफ़िल में परेशाँ देखा
फिर बहार आई ख़िज़ाँ-दीदा चमन में सद-शुक्र
आज फिर 'राफ़त'-ए-महज़ूँ को ग़ज़ल-ख़्वाँ देखा
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