हमारे ध्यान में हर लम्हा मुस्कुराता है

By syed-masood-naqviJanuary 5, 2024
हमारे ध्यान में हर लम्हा मुस्कुराता है
वो एक शख़्स हमें अब भी याद आता है
जो हारता है मोहब्बत में जीत जाता है
फिर इस के बा'द फ़क़त क़हक़हे लगाता है


कोई न होगा मिरे बा'द मेरे जैसा यहाँ
ये बात मुझ को मिरा राज़दाँ बताता है
ग़लत दुरुस्त के बारे में जानता नहीं कुछ
मैं क्या करूँ कि मुझे 'इश्क़ रास आता है


तिरे वजूद से मिट जाती है मिरी वहशत
तिरा यक़ीन मुझे मुनफ़रिद बनाता है
जो दा'वे करते हैं सच्चाई के यहाँ 'मस'ऊद'
फिर उन का चेहरा हमें सारे सच बताता है


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