हमारे हिस्सा में कुछ ऐसे हम-सफ़र आए
By wasim-nadirJanuary 5, 2024
हमारे हिस्सा में कुछ ऐसे हम-सफ़र आए
हमें पता है कि हम कैसे अपने घर आए
अब और कैसे मोहब्बत का हक़ अदा करते
तुम्हारी क़ब्र में हम ख़ुद को दफ़्न कर आए
ग़ज़ल की आँख से देखा था हम ने दुनिया को
हर एक सम्त हमें फूल ही नज़र आए
हमारे पास जो गुल-दान था मोहब्बत का
हम उस में अपने ही ख़्वाबों की राख भर आए
हमारे साथी तो सब खो गए उड़ानों में
हमीं अकेले पलट कर ज़मीन पर आए
ये वक़्त कौन से क़िस्से सुनाने बैठ गया
निशान जितने थे दिल पर सभी उभर आए
हमें पता है कि हम कैसे अपने घर आए
अब और कैसे मोहब्बत का हक़ अदा करते
तुम्हारी क़ब्र में हम ख़ुद को दफ़्न कर आए
ग़ज़ल की आँख से देखा था हम ने दुनिया को
हर एक सम्त हमें फूल ही नज़र आए
हमारे पास जो गुल-दान था मोहब्बत का
हम उस में अपने ही ख़्वाबों की राख भर आए
हमारे साथी तो सब खो गए उड़ानों में
हमीं अकेले पलट कर ज़मीन पर आए
ये वक़्त कौन से क़िस्से सुनाने बैठ गया
निशान जितने थे दिल पर सभी उभर आए
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