हमीं अकेले नहीं ज़िंदगी से हारे हुए
By wasim-nadirJanuary 5, 2024
हमीं अकेले नहीं ज़िंदगी से हारे हुए
बहुत से लोग खड़े हैं बदन उतारे हुए
कई 'अज़ीज़ थे जिन से बिछड़ गए हैं हम
तरक़्क़ियों के सफ़र में बहुत ख़सारे हुए
किसी को दर्द भी अपना बता नहीं सकते
हैं मुश्किलों में बहुत रौशनी के मारे हुए
किसी ने देखा नहीं आस-पास थी जन्नत
थे आसमाँ की तरफ़ हाथ सब पसारे हुए
नज़र मिलाने की हिम्मत कहाँ से आएगी
पलट कर आएँगे अल्फ़ाज़ जब पुकारे हुए
बहुत से लोग खड़े हैं बदन उतारे हुए
कई 'अज़ीज़ थे जिन से बिछड़ गए हैं हम
तरक़्क़ियों के सफ़र में बहुत ख़सारे हुए
किसी को दर्द भी अपना बता नहीं सकते
हैं मुश्किलों में बहुत रौशनी के मारे हुए
किसी ने देखा नहीं आस-पास थी जन्नत
थे आसमाँ की तरफ़ हाथ सब पसारे हुए
नज़र मिलाने की हिम्मत कहाँ से आएगी
पलट कर आएँगे अल्फ़ाज़ जब पुकारे हुए
63188 viewsghazal • Hindi