हाँपते मौसम तड़ख़्ते टूटते दिन कट गए

By basheer-ahmad-basheerJanuary 19, 2024
हाँपते मौसम तड़ख़्ते टूटते दिन कट गए
कट गए जलते पिघलते खौलते दिन कट गए
छाँव कब आई मयस्सर दश्त-ए-इम्कानात में
भागते सायों के पीछे भागते दिन कट गए


चार-सू फैले थे खारे पानियों के सिलसिले
साहिलों से दूर उभरते डूबते दिन कट गए
कब किसी ग़ुर्फ़े से उतरी कोई ना-मस्तूर सत्र
हर्फ़-ओ-मा'नी की कमंदें डालते दिन कट गए


कट गए कुछ रोज़-ओ-शब करते रक़म आशोब-ए-'अह्द
कुछ कड़े वक़्तों की कड़ियाँ काटते दिन कट गए
वो ख़ुनुक-रुत लौट कर आई न फिर बीतीं रुतें
आग तपती सा'अतों की तापते दिन कट गए


ज़िक्र से अब फ़ाएदा क्या यार जैसे भी कटे
सर्द साँसों में सियाही घोलते दिन कट गए
आज तक सोचा नहीं था अब ख़याल आने लगा
किन गली कूचों में फिरते घूमते दिन कट गए


दर्द की करवट है क्या जाने वो क्या जिस के 'बशीर'
बे-ख़याली में ही सोते जागते दिन कट गए
84556 viewsghazalHindi