हर-सू है आज वक़्त के मारों का सिलसिला

By ishrat-jahangirpuriJanuary 3, 2024
हर-सू है आज वक़्त के मारों का सिलसिला
अल्लह-रे दर्दनाक नज़ारों का सिलसिला
पेश-ए-नज़र है शोख़ निगारों का सिलसिला
रंगों का क़ाफ़िला है बहारों का सिलसिला


बढ़ता गया फ़रेब-ए-तमन्ना के फ़ैज़ से
उन की निगाह-ए-नाज़ के मारों का सिलसिला
कैसा करम किया है ये फ़स्ल-ए-बहार ने
गुलशन में हर तरफ़ है शरारों का सिलसिला


रातों को तेरी याद में आँसू बहा किए
लौटा कभी न चाँद सितारों का सिलसिला
कब है मिरे जुनूँ को गवारा बहार में
दामन से जेब तक रहे तारों का सिलसिला


देखें तो आप 'मीर' से 'ग़ालिब' के दौर तक
रौशन है कितना सीना-फ़िगारों का सिलसिला
इस दौर में भी मस्त-ए-शराब-ए-वफ़ा हूँ मैं
क़ाएम है मुझ से बादा-गुसारों का सिलसिला


गुलज़ार-ए-काएनात की तंज़ीम देखिए
फूलों के आस-पास है ख़ारों का सिलसिला
'इशरत भरोसा उन की निगाहों पे क्या करें
वो भी है एक झूटे सहारों का सिलसिला


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