हर वक़्त ये दिल आप की तस्वीर निहारे
By nasir-misbahiJanuary 4, 2024
हर वक़्त ये दिल आप की तस्वीर निहारे
बेचारा अकेला है भला किस को पुकारे
क्यों आँख से बह जाए न अश्कों का समंदर
इक 'उम्र बसर करनी है यादों के सहारे
क्या भूल गए हम में ये दुनिया भी बटी थी
सब आप के हिस्से में था और आप हमारे
आँखें जो तिरे नाम थीं अब भी वो तिरी हैं
आँसू के कई क़तरे अभी तक हैं कुँवारे
वो मैं ही था पागल कि तिरी चाह में गुम था
हालाँकि किए वक़्त ने हर-चंद इशारे
यक-लख़्त जो उजड़ा है तो दोबारा न देखा
मा'सूम से सपने को कोई यूँ तो न मारे
ख़ुशबू न कोई रंग न कलियों का तबस्सुम
इस दाइमी पतझड़ को कोई कैसे गुज़ारे
'नासिर' ज़रा नींदों से भी अटखेलियाँ कर ले
ये चाँद भी अब डूब गया बुझ गए तारे
बेचारा अकेला है भला किस को पुकारे
क्यों आँख से बह जाए न अश्कों का समंदर
इक 'उम्र बसर करनी है यादों के सहारे
क्या भूल गए हम में ये दुनिया भी बटी थी
सब आप के हिस्से में था और आप हमारे
आँखें जो तिरे नाम थीं अब भी वो तिरी हैं
आँसू के कई क़तरे अभी तक हैं कुँवारे
वो मैं ही था पागल कि तिरी चाह में गुम था
हालाँकि किए वक़्त ने हर-चंद इशारे
यक-लख़्त जो उजड़ा है तो दोबारा न देखा
मा'सूम से सपने को कोई यूँ तो न मारे
ख़ुशबू न कोई रंग न कलियों का तबस्सुम
इस दाइमी पतझड़ को कोई कैसे गुज़ारे
'नासिर' ज़रा नींदों से भी अटखेलियाँ कर ले
ये चाँद भी अब डूब गया बुझ गए तारे
10564 viewsghazal • Hindi