हरीम-ए-दिल में अगर तेरी जुस्तुजू करते

By raft-bahraichiJanuary 4, 2024
हरीम-ए-दिल में अगर तेरी जुस्तुजू करते
न बुत-कदे की न का'बे की आरज़ू करते
ख़ुदा के वास्ते दे अब तो जाम ऐ साक़ी
ज़बान सूख गई है सुबू सुबू करते


किसी के 'इश्क़ में जल जल के ख़ाक हो जाते
बसान-ए-शम्अ' न हम शरह-ए-आरज़ू करते
तुम्हारा जल्वा तो देखा तुम्हें नहीं देखा
तमाम सर्फ़ हुई 'उम्र जुस्तुजू करते


ज़बाँ को रोकना था इख़्तियार में उन के
न बन पड़ी थी जो मूसा से गुफ़्तुगू करते
कभी तो हैरत-ए-दिल हम से पूछ लेता तू
तुझी से हम तिरे मिलने की आरज़ू करते


ये सच है वो हमें 'राफ़त' ज़रूर मिल जाते
अगर तलाश क़रीब-ए-रग-ए-गुलू करते
29366 viewsghazalHindi