हवा मिज़ाज बदलती है तब बिखरते हैं

By wasim-nadirJanuary 5, 2024
हवा मिज़ाज बदलती है तब बिखरते हैं
ख़ुशी से लोग बुलंदी से कब उतरते हैं
तुझे भुलाने को सीखा था शा'इरी का हुनर
हर एक शे'र में अब तुझ को याद करते हैं


हमें पता है तड़प तिश्नगी के बढ़ने की
इसी लिए तो सभी के गिलास भरते हैं
ग़ुबार इस लिए आँखों पे छाया रहता है
इधर से रोज़ कई क़ाफ़िले गुज़रते हैं


तिरा ख़याल सलामत तो क्या है तन्हाई
चराग़ वाले कहीं तीरगी से डरते हैं
94446 viewsghazalHindi