हज़ारों रंज सहते हैं हज़ारों ग़म उठाते हैं

By devesh-dixitFebruary 5, 2024
हज़ारों रंज सहते हैं हज़ारों ग़म उठाते हैं
हमारा हौसला देखो मगर हम मुस्कुराते हैं
निवालों की सही क़ीमत वही मज़दूर समझेगा
कि जिस के धूप में हाथों के छाले फूट जाते हैं


लुटा देते हैं हम जिन पर कमाई ख़ूँ पसीने की
वही बच्चे बुढ़ापे में हमें आँखें दिखाते हैं
गिरे शाख़ों से पत्तों का वही तो दर्द समझेंगे
दिलों के खेल में जो लोग अक्सर टूट जाते हैं


23699 viewsghazalHindi