हिर्स-ए-दुनिया जो तिरी आँख का तारा हुआ है

By ahmad-ayazFebruary 24, 2025
हिर्स-ए-दुनिया जो तिरी आँख का तारा हुआ है
ये किसी का न हमारा न तुम्हारा हुआ है
सिलवटें यूँ ही नहीं ख़ाक-ए-बदन पर हैं मिरे
वक़्त के हाथ ने पैकर ये सँवारा हुआ है


मसअला सिर्फ़ मिरी ज़ात से वाबस्ता नहीं
दहर में हर कोई तक़दीर का मारा हुआ है
रक़्स करता है जुनूँ शौक़-ए-फ़रावानी पर
जब से ये 'इश्क़ मिरी जान दोबारा हुआ है


काँप उट्ठी है सर-ए-शाम चराग़ों की लौ
हाँ किसी ने तो मिरा नाम पुकारा हुआ है
उस ने तोड़ा है उबलते हुए दरिया का ग़ुरूर
नाख़ुदा जो अभी मंजधार से हारा हुआ है


यूँ ही होंटों पे नहीं उभरे तबस्सुम के नुक़ूश
बज़्म में तो किसी जानिब से इशारा हुआ है
यूँ ही सीने से लगाता नहीं कोई भी 'अयाज़'
ख़ाक छानी है तो ये दश्त हमारा हुआ है


60992 viewsghazalHindi