हम अपनी हक़ीक़त से मुकर जाएँगे इक दिन
By shehzad-anjum-burhaniJanuary 5, 2024
हम अपनी हक़ीक़त से मुकर जाएँगे इक दिन
कितनी भी दु'आएँ दो प मर जाएँगे इक दिन
हरकत में हर इक शय की गुज़रने का 'अमल है
हम को भी गुज़रना है गुज़र जाएँगे इक दिन
हर सा’अत-ए-आइंदा इस उम्मीद पे आई
हालात हैं हालात सँवर जाएँगे इक दिन
कुछ ख़्वाब हैं आँखों में तो कुछ दिल में उमंगें
ये साग़र-ओ-मीना भी तो भर जाएँगे इक दिन
यूँ है कि बस इक सिलसिला-ए-रद्द-ए-नफ़ी है
लगता है कि तुम से भी मुकर जाएँगे इक दिन
'अंजुम' तू जहाँ जा के अभी गोशा-नशीं है
मिलने को तुझे अहल-ए-नज़र जाएँगे इक दिन
कितनी भी दु'आएँ दो प मर जाएँगे इक दिन
हरकत में हर इक शय की गुज़रने का 'अमल है
हम को भी गुज़रना है गुज़र जाएँगे इक दिन
हर सा’अत-ए-आइंदा इस उम्मीद पे आई
हालात हैं हालात सँवर जाएँगे इक दिन
कुछ ख़्वाब हैं आँखों में तो कुछ दिल में उमंगें
ये साग़र-ओ-मीना भी तो भर जाएँगे इक दिन
यूँ है कि बस इक सिलसिला-ए-रद्द-ए-नफ़ी है
लगता है कि तुम से भी मुकर जाएँगे इक दिन
'अंजुम' तू जहाँ जा के अभी गोशा-नशीं है
मिलने को तुझे अहल-ए-नज़र जाएँगे इक दिन
36208 viewsghazal • Hindi