हम करें बात दलीलों से तो रद होती है

By muzaffar-warsiFebruary 2, 2024
हम करें बात दलीलों से तो रद होती है
उस के होंटों की ख़मोशी भी सनद होती है
साँस लेते हुए इंसाँ भी हैं लाशों की तरह
अब धड़कते हुए दिल की भी लहद होती है


जिस की गर्दन में है फंदा वही इंसान बड़ा
सूलियों से यहाँ पैमाइश-ए-क़द होती है
शो'बदा-गर भी पहनते हैं ख़तीबों का लिबास
बोलता जहल है बद-नाम ख़िरद होती है


कुछ न कहने से भी छिन जाता है एजाज़-ए-सुख़न
ज़ुल्म सहने से भी ज़ालिम की मदद होती है
35892 viewsghazalHindi