हम किसी के कभी कहने पे नहीं चलते थे
By nitin-kabirJanuary 4, 2024
हम किसी के कभी कहने पे नहीं चलते थे
लोग थक जाते थे पैकर में नहीं ढलते थे
तोड़ डाले इन्हीं लोगों ने सब आ'ज़ा मेरे
ये वही लोग हैं अंदर जो मिरे पलते थे
अब वही आँखें उमीदों से हमें तकती हैं
हाँ वहीं आँखें कि हम जिन को बहुत खलते थे
थकने लगती थी वो लड़की हमें समझाते हुए
हम भी वो क़ैस थे जो दर से नहीं टलते थे
धीरे धीरे उन्हें भी रंग तिरा भाने लगा
तुझ से जो लोग 'नितिन' पहले बहुत जलते थे
लोग थक जाते थे पैकर में नहीं ढलते थे
तोड़ डाले इन्हीं लोगों ने सब आ'ज़ा मेरे
ये वही लोग हैं अंदर जो मिरे पलते थे
अब वही आँखें उमीदों से हमें तकती हैं
हाँ वहीं आँखें कि हम जिन को बहुत खलते थे
थकने लगती थी वो लड़की हमें समझाते हुए
हम भी वो क़ैस थे जो दर से नहीं टलते थे
धीरे धीरे उन्हें भी रंग तिरा भाने लगा
तुझ से जो लोग 'नितिन' पहले बहुत जलते थे
29891 viewsghazal • Hindi