हम ने जिस तरह गुज़ारी है गुज़ारे कोई

By mohammad-yasir-mustafviJanuary 4, 2024
हम ने जिस तरह गुज़ारी है गुज़ारे कोई
ऐसा लगता था कि ज़ंजीर से मारे कोई
ख़ुद-कुशी करने को दरिया की तरफ़ जाता हूँ
और मिल जाता है हर रोज़ किनारे कोई


ये मोहब्बत में फ़क़त कहने की बातें हैं मियाँ
ला के दे सकता नहीं चाँद सितारे कोई
ख़्वाब में छोड़ के तू जाता है यूँ होता है
जैसे गर्दन पे चलाए मिरी आरे कोई


कोई मूनिस नहीं यावर न मदद-गार कोई
दौर-ए-हाज़िर में नहीं देता सहारे कोई
आख़िर-ए-वक़्त पुकारा गया 'यासिर' 'यासिर'
कश्मकश में था कि शायद ही पुकारे कोई


27615 viewsghazalHindi