हम पे इल्ज़ाम बेवफ़ाई के
By bashir-farooqJanuary 2, 2024
हम पे इल्ज़ाम बेवफ़ाई के
हाए अंदाज़ दिलरुबाई के
उन के हाथ आ गई जहाँ-दारी
वो जो क़ाबिल न थे गदाई के
कारवाँ को उन्ही ने लूटा है
शोर थे जिन की रहनुमाई के
हम हैं ‘इज्ज़-ओ-नियाज़ की तस्वीर
आप पैकर हैं ख़ुद-नुमाई के
उन के दामन भी दाग़दार मिले
जिन को दा'वे थे पारसाई के
हम से पूछो कि क्या है लज़्ज़त-ए-ग़म
हम ने झेले हैं दुख जुदाई के
हम ने काटी हैं हिज्र की रातें
हम ने देखे हैं दिन जुदाई के
इन ख़ुदायान-ए-जब्र को 'फ़ारूक़'
ज़ो'म कितने हैं किबरियाई के
हाए अंदाज़ दिलरुबाई के
उन के हाथ आ गई जहाँ-दारी
वो जो क़ाबिल न थे गदाई के
कारवाँ को उन्ही ने लूटा है
शोर थे जिन की रहनुमाई के
हम हैं ‘इज्ज़-ओ-नियाज़ की तस्वीर
आप पैकर हैं ख़ुद-नुमाई के
उन के दामन भी दाग़दार मिले
जिन को दा'वे थे पारसाई के
हम से पूछो कि क्या है लज़्ज़त-ए-ग़म
हम ने झेले हैं दुख जुदाई के
हम ने काटी हैं हिज्र की रातें
हम ने देखे हैं दिन जुदाई के
इन ख़ुदायान-ए-जब्र को 'फ़ारूक़'
ज़ो'म कितने हैं किबरियाई के
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