हम तिरे ग़म के पास बैठे थे
By fahmi-badayuniFebruary 5, 2024
हम तिरे ग़म के पास बैठे थे
दूसरे ग़म उदास बैठे थे
बस वही इम्तिहाँ में पास हुए
जो तिरे आस-पास बैठे थे
शाह को भा गई थी इक दासी
सब मुसाहिब उदास बैठे थे
आँधी आई तो इंकिशाफ़ हुआ
कुर्सियों पर लिबास बैठे थे
बाम-ओ-दर को नहीं दिखाई दिए
तुम हमारे ही पास बैठे थे
आज था बादशाह का तीजा
क़ब्र पर सिर्फ़ दास बैठे थे
दोस्तों ने हँसा दिया आ कर
अच्छे-ख़ासे उदास बैठे थे
दूसरे ग़म उदास बैठे थे
बस वही इम्तिहाँ में पास हुए
जो तिरे आस-पास बैठे थे
शाह को भा गई थी इक दासी
सब मुसाहिब उदास बैठे थे
आँधी आई तो इंकिशाफ़ हुआ
कुर्सियों पर लिबास बैठे थे
बाम-ओ-दर को नहीं दिखाई दिए
तुम हमारे ही पास बैठे थे
आज था बादशाह का तीजा
क़ब्र पर सिर्फ़ दास बैठे थे
दोस्तों ने हँसा दिया आ कर
अच्छे-ख़ासे उदास बैठे थे
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