हम तिरे ग़म के पास बैठे थे

By fahmi-badayuniFebruary 5, 2024
हम तिरे ग़म के पास बैठे थे
दूसरे ग़म उदास बैठे थे
बस वही इम्तिहाँ में पास हुए
जो तिरे आस-पास बैठे थे


शाह को भा गई थी इक दासी
सब मुसाहिब उदास बैठे थे
आँधी आई तो इंकिशाफ़ हुआ
कुर्सियों पर लिबास बैठे थे


बाम-ओ-दर को नहीं दिखाई दिए
तुम हमारे ही पास बैठे थे
आज था बादशाह का तीजा
क़ब्र पर सिर्फ़ दास बैठे थे


दोस्तों ने हँसा दिया आ कर
अच्छे-ख़ासे उदास बैठे थे
62739 viewsghazalHindi