हम ने जज़्बात को सीने में दबा रक्खा है

By asima-farazJanuary 2, 2024
हम ने जज़्बात को सीने में दबा रक्खा है
दिल ने इस पर बड़ा तूफ़ान उठा रक्खा है
तू मुझे छोड़ चुका जा भी चुका है लेकिन
ख़ुद को अब तक तिरी दुनिया में बसा रक्खा है


बे-वफ़ाई तिरा लहजा तिरे झूटे वा'दे
एक मुस्कान ने हर दुख को छुपा रक्खा है
पुर-सुकूँ बैठे हैं यूँ तो तिरे आने पर भी
दिल की धड़कन ने मगर शोर मचा रक्खा है


हम ने दुश्मन का बुरा भी नहीं चाहा है कभी
लब पे हर इक के लिए हर्फ़-ए-दु'आ रक्खा है
जाओ ऐ अहल-ए-जहाँ ढूँड के लाओ उस को
जिस के ग़म ने हमें बीमार बना रक्खा है


मुंतज़िर आज भी उस की हैं ये काफ़िर आँखें
अब तलक राह में पलकों को बिछा रक्खा है
73278 viewsghazalHindi