हम ने तो उस से भी निभा ली है
By chand-kakralviJanuary 19, 2024
हम ने तो उस से भी निभा ली है
दिल मोहब्बत से जिस का ख़ाली है
अब तो आ जा ऐ धूप खिड़की पर
बर्फ़ आँखों में जमने वाली है
छाँव भी अब सुकूँ नहीं देती
जिस्म ने इतनी धूप खा ली है
कुछ बनाने की फिर ज़रूरत क्या
उस की तस्वीर जब बना ली है
ख़त्म झगड़ा नहीं हुआ घर का
जब कि दीवार भी उठा ली है
जिस पे चाहत के फूल खिलते थे
तुम ने वो शाख़ काट डाली है
दिल मोहब्बत से जिस का ख़ाली है
अब तो आ जा ऐ धूप खिड़की पर
बर्फ़ आँखों में जमने वाली है
छाँव भी अब सुकूँ नहीं देती
जिस्म ने इतनी धूप खा ली है
कुछ बनाने की फिर ज़रूरत क्या
उस की तस्वीर जब बना ली है
ख़त्म झगड़ा नहीं हुआ घर का
जब कि दीवार भी उठा ली है
जिस पे चाहत के फूल खिलते थे
तुम ने वो शाख़ काट डाली है
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