इन अपने हाथों से साग़र मुझे पिला तो सही
By nasir-nazeer-firaq-dehlviJanuary 4, 2024
इन अपने हाथों से साग़र मुझे पिला तो सही
लगी है दिल में जो ज़ालिम उसे बुझा तो सही
बनेगी क्योंके सरापा की इस तरह तस्वीर
पड़ा हुआ है जो पर्दा उसे उठा तो सही
इस आइने में नज़र आएगा ख़ुदा तुझ को
दुई के ज़ंग को सीने से तू हटा तो सही
क़ुबूलियत जिसे कहते हैं दौड़ी आएगी
दु'आ के वास्ते हाथों को तू उठा तो सही
हिलाल कोई कहेगा तो कोई फूल मुझे
ग़म-ए-फ़िराक़ में पूरा मुझे घुला तो सही
न दें बहिश्त जो तुझ को 'फ़िराक़' से कहना
ग़म-ए-हुसैन में आँसू कोई बहा तो सही
लगी है दिल में जो ज़ालिम उसे बुझा तो सही
बनेगी क्योंके सरापा की इस तरह तस्वीर
पड़ा हुआ है जो पर्दा उसे उठा तो सही
इस आइने में नज़र आएगा ख़ुदा तुझ को
दुई के ज़ंग को सीने से तू हटा तो सही
क़ुबूलियत जिसे कहते हैं दौड़ी आएगी
दु'आ के वास्ते हाथों को तू उठा तो सही
हिलाल कोई कहेगा तो कोई फूल मुझे
ग़म-ए-फ़िराक़ में पूरा मुझे घुला तो सही
न दें बहिश्त जो तुझ को 'फ़िराक़' से कहना
ग़म-ए-हुसैन में आँसू कोई बहा तो सही
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